हेलो दोस्तों नए टॉपिक पर ब्लॉक आया है जिसमें आपको quad group के बारे में जानने को मिलेगा।
जैसा कि आप सब जानते हैं चीन के साथ दुनिया की कैसे संबंध है और चीन विस्तार वादी सोच को लेकर अपने देश को या फिर देश के एरिया को बढ़ाने में लगा हुआ है इसी वक्त चार देश एक साथ आए हैं भारत अमेरिका ऑस्ट्रेलिया जापान जिनमें काफी साझेदारी है और काफी एमओयू साइन हुए हैं।
बात शुरू होती है 10 साल पहले जब ऑस्ट्रेलिया और चाइना के संबंध काफी जरूरी थे और उनके संबंध इसमें भी अच्छे थे क्योंकि चाइना के स्टूडेंट ग्रुप में से 70 परसेंट ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी में पढ़ने जाते थे और ऑस्ट्रेलिया चाइना से बिजनेस कांट्रैक्ट्स में था लेकिन समय दोस्तों एक जैसा नहीं रहा और समय ने पलटी मारी और इस वक्त ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंध चीन के साथ सही नहीं है जब 10 साल पहले ऑस्ट्रेलिया को काट के लिए इनवाइट किया था तो चाइना के दबाव में आकर ऑस्ट्रेलिया नहीं अपने आप को पुल आउट कर लिया था।
इसी वजह से उस टाइम क्वार्ड ग्रुप को वही खत्म कर दिया गया लेकिन 10 साल बाद चाइना का अग्रेशन बढ़ता जा रहा है वह विस्तार वादी सोच को आगे लेकर जा रहा है और अपने पड़ोसी देशों की जमीनों पर कब्जा करता जा रहा है।
चीन, अमेरिका को साफ संदेश देना चाहता है कि a सुपर पावर दुनिया में अमेरिका ही नहीं है जो पूरे विश्व में अपनी धाक जमाए रखें उसी कारणवश चीन अपनी धाक जमाने के लिए विस्तार वादी सोच का इस्तेमाल कर रहा है और पड़ोसी देशों के हिस्सों पर अपना कब्जा जमाने पर लगा हुआ है।
इसीलिए अमेरिका को एक व्हाट्सएप को दोबारा जीवित करने की आवश्यकता महसूस हुई लोग ऐसा मानना है कि आने वाले टाइम में एशिया सुपर पावर बनके उड़ेगा उनमें से एक कंट्री तो लगभग लगभग सुपर पावर बन चुकी है और चाइना यह बिल्कुल नहीं चाहता कि इंडिया एक सुपर पावर के रूप में उभरे तो चीन भारत के लिए आए दिन नई नई मुसीबत बनता जा रहा है जैसे कि आप सबको पता ही है पांगोंग tso , गलवान valley, maritime sphare, SAARC
और चीन अपने ऋण जाल में फसाकर देशों को अपनी तरफ करने में लगा हुआ है और उनके देशों को भारत के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के लिए तैयार कर रहा है।।
और इस डायलॉग का स्ट्रैटेजिक नहीं नहीं बल्कि इकोनामिक इंपॉर्टेंट भी है आज इस डायलॉग के थ्रू एशिया की कल छोटी से छोटी कंट्री जो डेवलपमेंट स्टेज पर है उनको लोन के थ्रू हेल्प मिलेगी और उनकी एक सीमांत धारण करने तथा उनको लोन प्रोवाइड करके उनका विकास करने की आवश्यकता है।
आप लोग ने देखा ही होगा श्रीलंका के हैंबनटोटा पोर्ट जिससे श्रीलंका को आखिर में चाइना को लीज पर देना ही पड़ा। श्रीलंका के पास चीन से लिया हुआ पैसा जो की लोन यानि कर्ज के रूप में लिया था और उसे चुका नहीं पाए।
चीन के विरोध में हम सब एक हुए है लेकिन देखना होगा कि हम जब तक एक रहे पाएंगे। और चीन का मुकाबला कर पाएंगे।
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